यूरोप के विकसित औद्योगिक देशों से तकनीकी ज्ञान

यूरोप के विकसित औद्योगिक देशों से तकनीकी ज्ञान

उद्देश्या । एकरूपता एवं सूत्रबद्धता तथा स्पष्ट एवं प्रभावशाली नेतृत्व के अभाव में काबान असफल सिद्ध हुई।

(u) बाधिक विकास – अठारहवीं शताब्दी के मध्य तक इटली आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ देश था । यहाँ की 80% जनसंख्या कृषि में लगी हुई थी। उपजाऊ नहीं थी । खेती-बाड़ी इटली के केवल आधे हिस्से में ही हो सकती या आधागक स्तर केवल दस्तकारी तक ही सीमित था। व्यापार का बहुत पास हुआ था। बैंकिंग के साधन सीमित ये। औद्योगिक विकास और आवि की कार्य नाम मात्र के ही थे । इटली के पिछड़े हुए औद्योगिक स्वरूप के पीछे कारण वहाँ आवागमन के साधनों का अभाव होना था । सामूहिक इटली मजल मार्गों का अभाव था । इटली का सम्पर्क केवल तटीय जल मार्गों द्वारा था।

आर्थिक सुधारों की ओर इटली का ध्यान

18वीं शताब्दी के अन्त से पूर्व कुछ विचारकों ने, जिनमें फर्डिनेंडो गलियानी, मीजारे बैकारिया, पीटरो बैरी’ इत्यादि प्रमुख थे, आर्थिक सुधारों की ओर इटली का ध्यान आकर्षित करना प्रारम्भ कर दिया था । 1730 ई० से 1733 ई० के मध्य में कारलो एमेनुअल तृतीय ने सार्डीनिया में और 1790 से 1829 ई० के मध्य फर्डिनेंड तृतीय ने टस्कनी में आर्थिक एवं औद्योगिक सुधार लागू कर दिये थे । इटली के परवर्ती अर्थशास्त्रियों – गियन डोमिनिको, रोमोग्नोसी, फेडेरिको कॉनफलेनिरी,10 कार्लोकैटेनियो11 -ने भी आर्थिक सुधारों की दलील दी । उन्होंने आर्थिक क्षेत्र में स्वतंत्रता, राष्ट्रीय बचत तथा विनियोग को प्रोत्साहन देने, आवागमन के अच्छे साधनों को विकसित करने और यूरोप के विकसित औद्योगिक देशों से तकनीकी ज्ञान के आयात की माँग की । इन अर्थशास्त्रियों की यह देन थी कि इटलीवासी आर्थिक सहयोग और एकता में इटली के एकीकरण का भविष्य देखने लगे।

पूँजी के आधार पर कृषि के विकास

19वीं शताब्दी के आरम्भ में पूँजी के आधार पर कृषि के विकास ने इटलीवासियों में केवल नवीन आर्थिक चेतना ही उत्पन्न नहीं की, वरन् इटली के औद्योगिक विकास में उसकी भूमिका उल्लेखनीय रही । कृषि सम्बन्धी नई मंडियों ने आवागमन के नये साधनों की आवश्यकता का अनुभव किया ।

उत्तरी व मध्य इटली में शीघ्र ही रेल्वे लाइनों का बिछना शुरू हो गया और भाप के इंजन का प्रयोग आरम्भ हुआ । यह उल्लेखनीय है कि इटली में रेल्वे का विकास झांस व जर्मनी की अपेक्षा कम था । फिर भी धीरे-धीरे रेल्वे लाइनें बिछाने काम चलता रहा | 1861 ई० तक इटली में 1623 किमी लम्बी रेल्वे लाइनें चुकी थी और यह कार्य केवल तीस वर्षों में हुआ था । इटली ने आरभ में न इग्लैण्ड से खरीदे किन्तु बाद में स्वयं बनाने लगा | 1854 ई० में इटली ने । रल्वे इंजन जेनोआ में बनाया । इटली के एकीकरण में रेल्वे के योगदान को हा भुलाया जा सकता है । इसका केवल इटली की आर्थिक व्यवस्था पर ही हा पड़ा, अपितु इसने राजनीतिक चेतना के विकास में भी योगदान दिया ।

गिल्ड अर्थव्यवस्था

गिल्ड अर्थव्यवस्था 1815 ई० से पहले ही विखण्डित होना आरंभ हो भार 1845 ई. तक पूर्णरूपेण समाप्त हो चुकी थी। इससे भी इटली के स्वरूप में परिवर्तन आया । इटलीवासी अब यह मानने लग गए थे कि विकास के लिए पुरातन व्यवस्था को समाप्त करना आवश्यक है क्योंकि गई थी और 18455 आर्थिक स्वरूप म औद्योगिक विकास ऐसा करने पर ही नये उद्यमी जन्म ले सकते है और आर्थिक क्रिया को मिल सकता है। (iii) प्रारम्भिक विद्रोह – गुप्त संस्थाओं द्वारा प्रदर्शित क्रान्तिकारी आन्दोलन एक क्रम 19वी शताब्दी के द्वितीय दशक से आरम्भ हुआ, जो तीस वर्ष चलता रहा । 1820 ई. के स्पेन के विद्रोह से प्रेरणा पाकर नेपिल्स एवं पीदमार की जनता ने वहाँ के शासकों से संविधान की स्थापना की मांग की। सबसे विद्रोह नेपिल्स में हुआ किन्तु आस्ट्रिया द्वारा सैनिक हस्तक्षेप के कारण यह असर रहा | अभी नेपिल्स के विद्रोह को दबाया भी न जा सका था कि पीडमाट और लोम्बार्डी में हलचल प्रारंभ हो गयी । पुन: आस्ट्रिया की सेनाओं ने विद्रोह को दह दिया । इस प्रकार इटली में एक बार फिर राजतंत्र को सुरक्षित किया गया पर जनता की संविधान की माँग को दबाने से इटली में राजतंत्र के निरंका तय रूढ़िवादी स्वरूप के विरुद्ध इटली की भावनाएं उग्र हो गई। राजतंत्र बिटन रूढ़िवादी तथा प्रतिक्रियावादी होता गया, इटली उतना ही उदारवादी त्य देशभक्ति से प्रेरित राष्ट्रवादी होता गया।

इटली में नये युग का सूत्रपात

फ्रांस में 1830 ई० की क्रान्ति होते ही इटली में एक बार फिर विद्रोह शुरूहे गया । पोप की रियासतों में उग्र प्रदर्शन हुए। परमा और मोडेना के राज्यों के उसके शासक निकाल दिये गये | इन विद्रोहों के विरुद्ध आस्ट्रिया ने तुरन्त कोर कार्रवाई की और अपदस्थ शासकों को पुनः अपने-अपने सिंहासनों पर जरू कराया । इस प्रकार आस्ट्रिया ने दो बार इटलीवासियों की राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता प्राप्ति की अभिलाषा को कुचल दिया। फिर भी इन असफल प्रयल भविष्य की आशा जगायी।

1830 ई० की क्रान्ति को सफलता नहीं मिली तो उसका सबसे बड़ा कार अभी भी लोगों की राजनीतिक उद्देश्य के बारे में अनिश्चितता थी। अब यह हो गया कि बिना व्यापक संगठन और योजना के केवल स्थानीय स्तर पर विद्या करने से इटली में नये युग का सूत्रपात असम्भव है | 1820 ई. और 18307 विद्रोहों की असफलता से इटली के नेताओं को यह भी ज्ञात हो गया कि जब आस्ट्रिया के आधिपत्य का अन्त नहीं हो जाता, तब तक उनके स्वतंत्रता एकता के प्रयत्न निरर्थक होंगे। (iv) लेखकों के प्रयास – इटली के पुनर्जागरण के इतिहास में राजना सामाजिक तथा आर्थिक तत्त्वों के साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में लेखकों, दार्शनिक आलाचका का योगदान भी सराहनीय रहा। 1821 ई. में ही फास्कोल तथा नामक महान् लेखकों को उनकी देश भक्ति की भावनाओं के कारण देश निकाल दिया गया था। 1832 ई० में सिल्वियो पोलिको ने आस्ट्रिया के जेलखानों की वर्षीय वृतान्त ‘ल मि प्रिजियोनी 12 नामक पत्रिका में लिखा । इसका प्रभाव बहत अधिक पड़ा । इटलीवासियों को इस लेख से यह पक्का विश्वास हो गया अत्याचारी आस्ट्रिया से इटली को मुक्त कराना आवश्यक है । 1843 ई० में  बी. एक दार्शनिक एवं देशभक्त, ने अपनी पुस्तक ‘इटली की नैतिक और रिक श्रेष्ठता14 में इटली के राज्यों के संघ की वकालात की थी । वह चाहता आस्ट्रिया को इटली से निकालने के बाद पोप की अध्यक्षता में इटालियन राज्यों का एक संघ बने । कुछ ऐसे भी लेखक थे जिनका विचार था कि सारे राज्यों का मार्डीनिया में विलय हो जाय, तो एक शक्तिशाली और संगठित राजतंत्र के रूप में इटली का प्रादुर्भाव निश्चित है 115

() मेजिनी और युवा इटली –

इटली की एकता के लिए जो भी प्रयत्न 1830 ई० तक हुए वे सब असफल रहे । आस्ट्रिया की शक्ति के सामने इटली के देशभक्तों को हारना पड़ा। इसी समय इटली में एक महान् विभूति का प्रादुर्भाव हुआ जिसने इटली के राष्ट्रीय जीवन में नई चेतना जागृत की ।

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